शायरों की शायरी

खुदा ही खुदा
इधर खुदा है, उधर खुदा है,
जिधर देखो उधर खुदा है,
इधर-उधर बस खुदा ही खुदा है
जिधर नही खुदा है….उधर कल खुदेगा!

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प्यार इसे कहते हैं
जवानी को ज़िन्दगी की निखार कहते हैं,
पथ्जद को चमन का मज्धार कहते हैं,
अजीब चलन हैं दुनिया का यारो,
एक धोका हैं जिसे हम सब “प्यार” कहते हैं !

फारूकी

दुःख तू  यह  हे  के  अपने  ही  हाथों
घिर  महफूज़  हू  गया  जीवन

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हम  ने  घाम  में  इलाज  दूंध  लिया
वरना  सुब  ला-इलाज  बैठे  हैं

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इशाक  की  राह  पर्ने  वलून  को
हिजर  बी-चैन  कर  के  मरता  हे

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अपना  अपना  नसीब  होता  हे
हम  भरे  शहर  में  अकेले  हैं

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तुम  ने  दिल  का  कहा, तू  फिर  सुन  लू
हम  ने  बुक्सा  तुम्हें  कियामत  तक!!

चाहत

तेरे  लबों   से  है  रंगत   फोलों   में
तेरी  आंखों  से  है  चमक  सितारों  में

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तू  जो  मुस्कुराके   देख  ले  आसमान   को
चाँद  भी  शरमाके   झुक  जाए  तेरे  क़दमो   में

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दुनिया   में  लाखों  हसीं  हैं
तू  एक  हसीन  है  लाखों  में

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सो  रहे  थे  जज्बात   मेरे  तेरे  दीदार   से  पहले
तुझे   देख  कर  जागी   है  मोहब्बत  इस  दिल  में

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जो  तुम  मिल  गई  अगर  मुझ   को  आये   सनम
रोनक   हो  जायेगी  मेरी  जिंदगानी   में

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मैंने  तेरे  प्यार  में  दिलको   ज़ख्मी   कर  लिया  है
अब  तो   चुपाले   मुझको  अपने  आँचल   की  आड़   में

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कुबूल   कर  मेरे  प्यार  को  आये  जाने -ऐ -फसीह
न  मिलेगा  मुझ  जैसा  आशिक   सारी   दुनिया   में

मोहब्बत मैं जुदाई क्यों है

आये खुदा तुने  मोहब्बत  यह  बनाई  क्यों  है ?
गर  बनाई  तो  मोहब्बत में जुदाई क्यों है?

क्यों दीया प्यार मुझे इसकी ज़रूरत क्या थी
मेरी बर्बादी मैं शामिल तेरी हिकमत क्या थी
मेरी राहों में खुशबू का सफर रहता था
दिल में आबाद गुलाबों का नगर रहता था
ज़िंदगी खार भरी राह में लायी क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?

मैं हूँ बिखरी हुई गर्दिश में सितारे मेरे
घूम के तूफान में डूबे है किनारे मेरे
न खतावार न मुजरिम न गुनहगार हूँ मैं
सच तो  यह है के मोहब्बत की परस्तार हूँ मैं
यह सज़ा फिर भी मेरे हिस्से में आई क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?

मैं अगर रोऊँ तो सेहरा को समंदर कर दूँ
सख्त हो जाऊँ अगर मोम को पत्थर कर दूँ
राख हो जाए जहाँ मैं अगर आह भारू
आसमान टूट पड़े तुझसे  जो फरियाद  करू
इतनी गहराई मेरे इश्क में आई क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?
गर बनाई तो मोहब्बत में जुदाई क्यों है?