फारूकी

दुःख तू  यह  हे  के  अपने  ही  हाथों
घिर  महफूज़  हू  गया  जीवन

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हम  ने  घाम  में  इलाज  दूंध  लिया
वरना  सुब  ला-इलाज  बैठे  हैं

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इशाक  की  राह  पर्ने  वलून  को
हिजर  बी-चैन  कर  के  मरता  हे

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अपना  अपना  नसीब  होता  हे
हम  भरे  शहर  में  अकेले  हैं

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तुम  ने  दिल  का  कहा, तू  फिर  सुन  लू
हम  ने  बुक्सा  तुम्हें  कियामत  तक!!

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