फारूकी
February 14, 2008 — ramkissmeदुःख तू यह हे के अपने ही हाथों
घिर महफूज़ हू गया जीवन
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हम ने घाम में इलाज दूंध लिया
वरना सुब ला-इलाज बैठे हैं
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इशाक की राह पर्ने वलून को
हिजर बी-चैन कर के मरता हे
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अपना अपना नसीब होता हे
हम भरे शहर में अकेले हैं
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तुम ने दिल का कहा, तू फिर सुन लू
हम ने बुक्सा तुम्हें कियामत तक!!