मोहब्बत मैं जुदाई क्यों है

आये खुदा तुने  मोहब्बत  यह  बनाई  क्यों  है ?
गर  बनाई  तो  मोहब्बत में जुदाई क्यों है?

क्यों दीया प्यार मुझे इसकी ज़रूरत क्या थी
मेरी बर्बादी मैं शामिल तेरी हिकमत क्या थी
मेरी राहों में खुशबू का सफर रहता था
दिल में आबाद गुलाबों का नगर रहता था
ज़िंदगी खार भरी राह में लायी क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?

मैं हूँ बिखरी हुई गर्दिश में सितारे मेरे
घूम के तूफान में डूबे है किनारे मेरे
न खतावार न मुजरिम न गुनहगार हूँ मैं
सच तो  यह है के मोहब्बत की परस्तार हूँ मैं
यह सज़ा फिर भी मेरे हिस्से में आई क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?

मैं अगर रोऊँ तो सेहरा को समंदर कर दूँ
सख्त हो जाऊँ अगर मोम को पत्थर कर दूँ
राख हो जाए जहाँ मैं अगर आह भारू
आसमान टूट पड़े तुझसे  जो फरियाद  करू
इतनी गहराई मेरे इश्क में आई क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?
गर बनाई तो मोहब्बत में जुदाई क्यों है?

One Response to “मोहब्बत मैं जुदाई क्यों है”

  1. tarun Says:

    dost khuda ne mohebbat….kuch soch ke hi banai……
    hai………
    aur isme jo judai hai na use to kuch adhik hi soch ke banai hai………
    jo mohabbat na banai hoti jo judai na banai hooti…..
    to tumhari ungali se kya shayari ki likhai hoti………..????/

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