100 kiss
February 14, 2008 — ramkissmeशाम होते ही चिरागों को बुझा देता हूँ
यह दिल ही काफ़ी है तेरी याद मैं जलने के लिए
ई मेरे जुर्म गिनाने वाले
तेरे घर कोई आइना है क्या?
हमने आपकी यद् मे सिगरेट जलाई
मगर कम्भाकत ढूएने भी तेरी तस्वीर बनाई.
बेवफा होके जब चल ही दिए थे छोड़ के
क्यों मिल जाते हो कभी इस मोड़ पे, कभी उस मोड़ पे
मैंने तुम्हारे यादों में रो रो के तुब भर दिया
मगर तुम इतनी बे-वफ़ा निकले की नहाके चल दिए.
बेवफा सनम से तो सिग्रत्ती अची है,
बेवफा सनम से तो सिग्रत्ती एकही है ,
दिल जलती है, पर होतो से तो लगती है
मैंने उनसे प्यार किया,
यह मेरे प्यार की हद थी.
मैंने उनपे इतबर किया,
यह मेरे इतबर की हद थी.
मरकर भी खुली रही मेरी आखें,
यह मेरे इंतिज़ार की हद थी.
फितरत मे नही हमारे,
मोहब्बत मे आसन बहाना,
बेवाफैको उनकी अपनी यादों मे दोहराना,
दो बूँद शराब की,
भुलादेती है सरे गम,
और,फिर किसी नई महबूबा की तलाश मे
निकल पड़ते है हम !!
