हँसी के रसगुलले

एक आदमी की पत्नी एकाएक कही गायब हो गई

”सुना हैं  आपकी पत्नी कही गायब हो गई? ” िकसी ने पूछा

” जी हाँ! आपने ठीक सुना हैं ” उतर मिला

”पुलिस मे रिपोर्ट लिखा दी

”नही”

”क्यो”

”िपछली बार जब मेरी पत्नी गायब हुई थी मैंने पुलिस मे रिपोर्ट िलखवाई थी

तब बहुत गङबङ हो गई थी ”

”केसी गङबङ”?

”पुलिस वाले उसे तलाश करके ले आये थे!!

ना कोई मेरी मंजिल है न किनारा……है

न  कोई  मेरी  मंजिल  है  न  किनारा

तन्हाई  मेरी  महफिल  और  यादें  मेरा  सहारा

उनसे  बिचाद  कर  कुछ  यूं  वक्त  गुज़रा

कभी  ज़िंदगी  को  तरसे  कभी  मौत  को  पुकारा

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यादो  मैं  कभी  आप  भी  खोये  होगे

खुली  आंखो  से  कभी  आप  भी  सोये  होगे

माना  हँसना  है  आदत  गम  छुपाने  की

पर  हस्ते  हस्ते  कभी  आप  भी  रोये  होगे

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जो  पूछता  है  कोई  सुर्ख  किउन  हैं  आज  आंखें

तो  आंख  मॉल  के  खेती  हों  के  रात  सो  न  सकी

हज़ार  चाहों  मगर  यह  न  खे  सको  गी  कभी  भी

के  रात  रोने  की  खुव्हिश  थी  मगर  रू  न  सकी

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चाँद  लम्हात  के  वास्ते  ही  सही

मुस्कुराकर  मिली  थी  मुझे  जिंदगी

तेरी  आघोष  में  दिन  थे  मेरे  कटे

तेरी  बाहों  में  थी  मेरी  राते  कटी

आज  भी  जब  वह  पल  मुझको  याद  आते  है

दिल  से  सारे  ग़मों  को  भुला  जाते  है

बीते  लम्हें  हमें  जब  भी  याद  आते  है

न सोचा न समझा न सीखा न जाना

न  सोचा न समझा न सीखा न जाना
मुझे आ गया खुदबखुद दिल लगना…..

जरा देखा कर अपना जलवा दिखाना
सिमट कर यही आ न जाए जमाना….

जुंबा पर लगी हैं वफावो की मुहरे
खामोशी मुझे कह रही हैं फ़साना ….

गुलो तक लगाई तो आशा हैं लेकिन
हैं दुश्वार कांटो से दामन बचाना….

करो लाख तुम मातम-ऐ-नौजवानी
प ‘मीर’ अब नही आयेगा वोह ज़माना….

शायरों की शायरी

खुदा ही खुदा
इधर खुदा है, उधर खुदा है,
जिधर देखो उधर खुदा है,
इधर-उधर बस खुदा ही खुदा है
जिधर नही खुदा है….उधर कल खुदेगा!

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प्यार इसे कहते हैं
जवानी को ज़िन्दगी की निखार कहते हैं,
पथ्जद को चमन का मज्धार कहते हैं,
अजीब चलन हैं दुनिया का यारो,
एक धोका हैं जिसे हम सब “प्यार” कहते हैं !

मोहब्बत मैं जुदाई क्यों है

आये खुदा तुने  मोहब्बत  यह  बनाई  क्यों  है ?
गर  बनाई  तो  मोहब्बत में जुदाई क्यों है?

क्यों दीया प्यार मुझे इसकी ज़रूरत क्या थी
मेरी बर्बादी मैं शामिल तेरी हिकमत क्या थी
मेरी राहों में खुशबू का सफर रहता था
दिल में आबाद गुलाबों का नगर रहता था
ज़िंदगी खार भरी राह में लायी क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?

मैं हूँ बिखरी हुई गर्दिश में सितारे मेरे
घूम के तूफान में डूबे है किनारे मेरे
न खतावार न मुजरिम न गुनहगार हूँ मैं
सच तो  यह है के मोहब्बत की परस्तार हूँ मैं
यह सज़ा फिर भी मेरे हिस्से में आई क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?

मैं अगर रोऊँ तो सेहरा को समंदर कर दूँ
सख्त हो जाऊँ अगर मोम को पत्थर कर दूँ
राख हो जाए जहाँ मैं अगर आह भारू
आसमान टूट पड़े तुझसे  जो फरियाद  करू
इतनी गहराई मेरे इश्क में आई क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?
गर बनाई तो मोहब्बत में जुदाई क्यों है?