जरा देखा कर अपना जलवा दिखाना
सिमट कर यही आ न जाए जमाना….
जुंबा पर लगी हैं वफावो की मुहरे
खामोशी मुझे कह रही हैं फ़साना ….
गुलो तक लगाई तो आशा हैं लेकिन
हैं दुश्वार कांटो से दामन बचाना….
करो लाख तुम मातम-ऐ-नौजवानी
प ‘मीर’ अब नही आयेगा वोह ज़माना….
प्यार इसे कहते हैं
जवानी को ज़िन्दगी की निखार कहते हैं,
पथ्जद को चमन का मज्धार कहते हैं,
अजीब चलन हैं दुनिया का यारो,
एक धोका हैं जिसे हम सब “प्यार” कहते हैं !
क्यों दीया प्यार मुझे इसकी ज़रूरत क्या थी
मेरी बर्बादी मैं शामिल तेरी हिकमत क्या थी
मेरी राहों में खुशबू का सफर रहता था
दिल में आबाद गुलाबों का नगर रहता था
ज़िंदगी खार भरी राह में लायी क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?
मैं हूँ बिखरी हुई गर्दिश में सितारे मेरे
घूम के तूफान में डूबे है किनारे मेरे
न खतावार न मुजरिम न गुनहगार हूँ मैं
सच तो यह है के मोहब्बत की परस्तार हूँ मैं
यह सज़ा फिर भी मेरे हिस्से में आई क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?
मैं अगर रोऊँ तो सेहरा को समंदर कर दूँ
सख्त हो जाऊँ अगर मोम को पत्थर कर दूँ
राख हो जाए जहाँ मैं अगर आह भारू
आसमान टूट पड़े तुझसे जो फरियाद करू
इतनी गहराई मेरे इश्क में आई क्यों है
आये खुदा तुने मोहब्बत यह बनाई क्यों है?
गर बनाई तो मोहब्बत में जुदाई क्यों है?